ज़न्नत की हूरों की ख़ातिर क्यों जन्नत को बर्बाद किया, पहलगाम की खुबसूरत वादी को क्यों तुमने शमशान किया , नए जीवन की सपने संजोकर कोई यहाँ पर आ...Read More
ज़मीन बेच क बाबु की,नई फार्च्यूनर कढ़वाई है, छोड़ क अपनी जमींदारी,या बिदेशी पूंछ बँधवाई है, माँ के हाथ की नुनी रोटी इब भावती कोनी, जबत शहरी मै...Read More
#क़त्ल करके #चाहत का अपनी हम उनकी #शादी में जा रहे है, #तोहफ़ा भी लिया है हमने हम उनके #शौहर से मिलके आ रहे है, #आँखों में #ऑंसू छिपाए है हमन...Read More
जितना झूठा इन्सान रहेगा, उतना वो परेशान रहेगा, मत छीन दूसरे की दौलत, ऊपर सबका हिसाब रहेगा, स्वर्ग मिलना तो मुश्किल है, जब तक तु बेईमान रहेग...Read More
आज़ादी के ख़्वाबों से एक दवात बनाई गई, शहीदों की शहादत की स्याही उसमे भरवाई गई, बुलंद होंसलों की तलवार कलम बन गई, इस तरह संविधान की नींव सजाई ...Read More
छीन कर आबरु एक महिला की, वो खुलेआम घूमता हैं, वो गुनाहों का बेटा हैं, पैसों के तख़्त पर बैठा हैं, पीकर जाम न्यौछावर का, न्याय उसके कदमों में...Read More
नारी सशक्तिकरण पर लिखने को जैसे ही कलम उठाई, सबसे पहले भ्रूण में मरने वाली उन बच्चियों की याद आई, नारी सशक्तिकरण के लिए सबसे पहले यही कदम उठ...Read More