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शायरी-shayari

02:13
 अब दीवारों से टकराकर वापिस आ जाती है आवाज़ हमारी , कभी हमारा हर लब्ज़ बड़ा शोर करता था।  लेखक - रितेश गोयल 'बेसुध 'Read More

शायरी-hate shayari

01:28
                                                                                                                                            ...Read More

पहलगाम-pahalgam

00:03
 ज़न्नत की हूरों की ख़ातिर क्यों जन्नत को बर्बाद किया, पहलगाम की खुबसूरत वादी को क्यों तुमने शमशान किया , नए जीवन की सपने संजोकर कोई यहाँ पर आ...Read More

राजनीति की जय बोलो। -politics

03:56
 ये कविता मैंने रामधारी सिंह दिनकर जी की कविता 'कलम आज उनकी जय बोल'  से प्रेरित होकर लिखी है।  देश को लुटा बारी-बारी , धर्म की भड़काक...Read More

शायरी-romantichsayari

02:27
 बड़ा बेचैन है दिल मेरा, अपनी बाँहों के इसे आगोष कर दे, थरथरा रहे है लब मेरे , रख कर अपने लब इन पर, इन्हें ख़ामोश कर दें।  लेख़क- रितेश गोयल ...Read More

फार्च्यूनर-fortuner

01:23
 ज़मीन बेच क बाबु की,नई फार्च्यूनर कढ़वाई है, छोड़ क अपनी जमींदारी,या बिदेशी पूंछ बँधवाई है, माँ के हाथ की नुनी रोटी इब भावती कोनी, जबत शहरी मै...Read More

शायरी - attitude shayari

03:09
  कलम घिस-घिस कर अपनी तुझे कागज़ पर उतारा है, थोड़ा सा सब्र रख मैं तुझे सबकी मुराद कर दूँगा, कुछ किरदार बाकी है इस कहानी में बस, जो तुझसे धोखा...Read More