पैंतालीस का इश्क़-romantic
जो बाल मेरे सफेद थे उनको मैंने रंग दिया,
दिल मेरा फ़िर से सपने सजाने लगा है,
एक हसीना के साथ घूमने जाने लगा है,
आज फ़िर से मैंने सफेद कुर्ता उतारकर रंगीन कमीज़ पहनी हैं,
शीशे में देख कर खुद की सुरत निखारी हैं,
सौंदर्य प्रसाधन जो मेरी अलमारी में दम तोड़ रहे थे,
उन्होंने फिर से अंगड़ाई ली है,
मेरी जवानी को सँवारने में अपनी कुर्बानी दी है,
एक उम्मीद सी फ़िर तूने दिल में जगा दी है,
मुझे अपनी आदत सी लगा दी है,
उमर मेरी पैंतालीस और तेरी चालीस के पार हो गयी है,
फ़िर भी तु मेरी जिंदगी में शुमार हो गयी है,
बस अब तो तु मुझे आकर संभाल ले,
मुझको तु अपनी हँसी से बांध ले,
हम दोनों मिलकर अपनी एक दुनिया बनाएंगे,
एक दूजे से किये हुए वादे निभाएंगे ,
हम दोनों एक दूसरे की दुनिया बन जाएंगे ,
फ़िर बच्चों को अपने किस्से सुनाएंगे।
लेखक- रितेश गोयल 'बेसुध'
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