दिलजला आशिक
बेशक तु कर ले किसी और से शादी,
अगर मुझे रुलाया तो तेरी हार पक्की है,
अपनी शादी मे बुलायेगी तो खाना खाने आऊंगा,
अपने चार दोस्तों को भी साथ लाऊंगा,
उन्हें मैं दिखाऊँगा उनकी बेवफा भाभी,
जिसने कर ली किसी और से शादी,
मैं दिलजला आशिक हूँ खुद को और नहीँ जलाउंगा,
तेरे सामने तेरी बहन को पटाऊंगा,
इस तरह मैं तेरा जीजा बन जाऊँगा,
सच पूछो तो मुझे करनी ही थी तेरी बहन से शादी,
मगर वो कहती थी मेरी बहन है बाकी,
इसलिए खेली मैंने यह बाज़ी,
और लो हो गयी तुम्हारी शादी।
लेखक- रितेश गोयल 'बेसुध'
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