चाहत-एक गजल

आंँखों में मेरी रहो तुम यूं ही रात भर,
ख्वाब बनकर तुम मुझे सताती रहो,
नींद आए मुझे तो तुम सोने ना दो,
रात भर तुम मुझे यूं ही जगाती रहो,
हौसला प्यार का मेरा होगा ना कम,
चाहे कितना कहर ये जमाना करें,
चाहा है तुमको और चाहते ही रहेंगे,
फिर मौत ही ना क्यों फिर हमको मिले,
गाएंगे लोग मेरी मोहब्बत के किस्से,
गलियों में तेरी यूं ही चिख-चिख कर,
आशिक था इसकी एक जिसने रख दिया,
दिल हथेली पर इसकी अपना चीर कर।
लेखक-रितेश गोयल 'बेसुध' 

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