मोहब्बत-एक ख्याल
कोई तो आकर मुझे फिर से संभाल ले,
बातों को मेरी अपनी हंँसी से बांँध ले,
यादों की कसम उसको वादों को ना तोड़े,
ख्वाबों में रहे हरदम सांँसों को ना छोड़े,
चाहा है उसे हमने अपने दिल-ओ-जान से,
माँगा है दुआ में उसे अपने श्रीराम से,
मोहब्बत की कसम है मुझे छोड़ गई तो,
दे देंगे जान उस पल ही दीन-ओ-ईमान से।
लेखक-रितेश गोयल 'बेसुध'
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