शायरी-haryanvi

अपनी मर्जी त कर लो या घर आला की मर्जी त, 
या ब्याह की रीत त निभानी पड़गी, 
घोड़ी प चढ़ क ख़ुद ए मुसीबत लाये थे न, 
इब मुँह की त खानी पड़गी। 
लेखक- रितेश गोयल 'बेसुध'

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