शायरी

बूढ़े भी लगा कर बालों में मेहंदी दुल्हे के जैसे सजने लगे हैं, 
आ रहा है फरवरी का महीना सख़्त लौंडे भी देखो पिंघलने लगे हैं। 
लेखक- रितेश गोयल 'बेसुध'

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