शादीशुदा-biwi per shayari

comedy

आँखों में गम को छुपा कर मुस्करा रहे हो ,
कन्धे झुकें हुए है फिर भी तना रहे हो ,
बोलते हुए आवाज़ लड़खड़ा रही हैं ,
हालत तुम्हारी सब बता रही हैं ,
डरते हुए कट रही है जवानी तुम्हारी ,
क्या इस से अलग़ है कहानी तुम्हारी ,
मुझ से बात करते हुए भी तुम सहमे से लगते हो ,
इसलिए मुझे कुँवारे नहीं शादीशुदा लगते हो। 
लेखक - रितेश गोयल 'बेसुध'

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