शादी का च्यवनप्राश

सुख और दुख को मिलाया गया,
लड़की को शक्ति और लड़के को सहन शक्ति से सजाया गया,
तब जाकर यह शादी का च्यवनप्राश बनाया गया।

शादी का च्यवनप्राश जिसने खाया,
जवानी में बुढ़ापे को पाया,
बड़े से बड़ा पहलवान भी इस शादी का भोज नहीं उठा पाया,
इसलिए अखाड़ों में मुख्य नेता होता है बाल ब्रह्मचारी भाया,
शादी के बाद बीवी वह दाँव सिखाती है,
जो बडे़ से बड़े नेता के भी समझ नहीं आती है,
जो कुंवारे हैं उनके मन में आस है,
जो शादीशुदा है उनके गले में फांस है,
खैर एक दिन तो सभी को जाना है,
किसी को मर्जी से तो किसी को जबरदस्ती ब्याह करवाना है,
आखिर में चलते-चलते जिसकी हो गई उसको बहुत बधाई,
जिसकी होने वाली है उसके लिए दुहाई, 
अच्छा चलते हैं राम-राम भाई।
लेखक-रितेश गोयल 'बेसुध'

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