शायरी

लोग कहते हैं बिना खून बहाए अहिंसा से आजादी आई,
तो क्या उन तेईस साल के नौजवानों ने खाम़खा अपनी जान गवाई,
अगर आजादी को पाना इतना ही आसान था,
तो क्यों उन मस्तानों का टोला इस आजादी पर कुर्बान था।
लेखक-रितेश गोयल 'बेसुध'

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