तेजाबी इश्क
एक लड़का एक लड़की को चाहने लगा,
अपने अरमानों को उस पर जताने लगा,
एक दिन कर दिया उसने अपनी मोहब्बत का इजहार, मगर उस लड़की ने कर दिया इनकार,
वह ना उस लड़के को बर्दाश्त नहीं हो पाई,
अजी किसी के ना कहने से उसकी मर्दानगी की हार नहीं हुई,
मगर यह बात उस लड़के को समझ नहीं आई,
उसने तेजाब की बोतल उठाई और उस लड़की पर पलटाई,
उसकी खूबसूरती पल में झुलस गई,
एक और लड़की इस तेजाबी इश्क की बलि चढ़ गई,
क्या आजकल मोहब्बत इतनी ही रह गई है,
लड़की के ना कहते ही तेजाब डालने में मर्दानगी रह गई है,
उसकी मोहब्बत इतनी ही सच्ची है तो क्या वह अब उस लड़की को अपनाएगा,
क्या उसके झुलसे हुए चेहरे से प्यार कर पाएगा,
जो मर्दानगी उसने उस पर तेजाब फेंकने में दिखाई थी,
क्या उसी के साथ वह उसका जीवन भर साथ निभाएगा,
उससे शादी कर पाएगा,
अजी रहने दो आज के युवाओं के लिए प्यार सिर्फ एक खेला है,
ऐसे झूलसे हुए केसों से भरा हुआ अदालत का थैला है,
अंत में इतना ही कहना चाहूंँगा,अगर किसी को चाहते हो तो इजहार करो,
और अगर वह ना करें तो उस ना का सम्मान करो।
काश तू एक लड़की का बाप हो जाए,
फिर तेरे जैसे एक आशिक को उससे प्यार हो जाए,
जब वह उसकी खूबसूरती को झुलसाएगा,
तब तुझे उस पीड़ित परिवार का दर्द समझ आएगा।
जय हिंद।
जय भारत।
लेखक-रितेश गोयल 'बेसुध'
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