भरष्टाचार बनाम भारत
देश की जनता परेशान है इस अत्याचार से,महंगाई की मार से,इस सारे भृष्टाचार से ,
प्रलोभन का जाल भिछा है देखो चारों ओर ,
फस जाती है भोली जनता बनके लालचख़ोर ,
इस ही लिए तो लूट रहे है देश को नेता सारे ,
खा जाते है सारी मलाई मारे बिना डकारें ,
ये कैसी हुड़दंग मची है आगे बढ़ने की ,
पाँव के निचे दभी है चाहे गर्दन दूजे की ,
अँधा पथ पर बढ़े जा रहा ,चाहे मातृभूमि की खिंचे साडी ,
लूट-खसौट मची है देखो ,बिन चिठ्ठी बिन पांखी ,
बंद करो ये लालाचखोरी, करनी है अगर देश की छाती चौड़ी ,
भृष्टाचार मिटाना है ,भृष्टो को हटाना है,
गाँधी का वक़्त अब चला गया,आज़ाद को लाना होगा ,
भरष्टाचार मिटा कर हिन्द नया बनाना होगा।
जय हिन्द।
By- Ritesh Goel 'Besudh'
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