शादी का कार्ड

कल दफ्तर से घर आया तो पत्नी ने बताया,
आपके मित्र के यहाँ से शादी का कार्ड आया,
यह खबर सुन कर मैं गम्भीर हो गया थोड़ा,
एक और मित्र ने शादी का लड्डु फोड़ा,
मन ही मन मैं बुदबुदाया वाह क्या सन्देश आया है,
आज मेरा ऊँट पहाड़ के नीचे आया है,
पढ़ते-पढ़ते मन मेरा भटका,
अपनी विरह कथा में जाके अटका,
मेरे दिल ने दिया मुझे झटका,
मेरे कल में ले जाकर पटका,
मैंने भी ऐसे ही शादी का कार्ड छपाया था,
आपकी भाभी जी को श्रीमती बनाया था,
तब से आज तक यु ही रो रहे है,
वो मैले कपडों की तरह हमको यु ही धो रहे है,
खैर ये तो हर शादीशुदा की आपबीती है भाई,
पता तो उसे चलेगा जिसकी आनी है लुगाई,
कुल मिला कर मित्र बधाई हो
बधाई।
By- Ritesh Goel 'Besudh'

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