अक्सर मैं दुनिया से गायब हो जाता हूँ,सिर्फ़ कुछ अपनो को ही मैं नज़र आता हूँ,मुझे देखने के लिए अपनेपन का चश्मा चढ़ाना पड़ता हैं,चुगलखोरो के लिए तो मैं मिस्टर इंडिया हो जाता हूँ । लेखक- रितेश गोयल 'बेसुध'
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