शायरी-anniversary
शादी करके वो एक सुहानी रात बन कर आ गई,
जीवन में मेरे खुशियों का उन्माद बन कर आ गई,
बढ़ाया मेरी वंश बेल को अगली पीढ़ी तक,
जिस तारीख को बँधे थे हम एक गठबंधन में,
वो फ़िर से मीठी याद बन कर आ गई।
शादी की सालगिरह मुबारक हो धर्म-पत्नी जी
लेखक- रितेश गोयल 'बेसुध'
Post a Comment