सख़्त लौंडा

हर लड़की को देख कर अपने मन में आँहे भरते हैं, 
अजी हम सख्त लौंडे हैं लड़की के सामने नहीं पिंघलते हैं। 
कितनी रातें मैं यू ही अकेले तन्हा कांटु, 
कब तक ये सिंगल का टैग अपने माथे पर टांगु, 
इश्क़ करने की हसरत हमने भी दिल में पाली हैं, 
एक मोहब्बत वाली जगह हमारे दिल में भी खाली हैं, 
हम भी चाहते हैं प्यार की खुशबू से महके हमारे दिल का भी कोना-कोना, 
कोई हम को भी कहकर पुकारे बाबु-शोना, 
हम भी किसी का हाथ पकड़कर मजनूं के टीले पर बैठे, 
आलिंगन में भरकर उसके दिल में झाँके, 
न जाने कब पुरा होगा ये मेरा सपना, 
बेहद अखरता हैं मुझे अब मेरा ये सख्त होना, 
जी चाहता है सब लड़कियों के तलवे चांटु, 
उन सभी को अपना मोबाइल नंबर बांटू, 
भाड़ में जाए ये सख़्त लोंडे सा फेमअस होना, 
इस से तो अच्छा सब अपने को मजनु बोले, 
लड़की का पालतू चाहे पप्पी बोले, 
अब मैं सिंगल से मिंगल हो जाऊँगा, 
अपना ये सख़्त लौंडे का टैग हटवाउंगा। 
लेखक- रितेश गोयल 'बेसुध'

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