शायरी-hindishayari

इंसानियत तु आज भी मुझमे कही ज़िंदा हैं, 
तभी तो गलत होने पर हम हो जाते शर्मिन्दा हैं। 
लेखक- रितेश गोयल 'बेसुध'

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