परेशानियांँ अपनी छुपाकर वो हरदम मुस्कुराता है,खुद फटे हाल रहकर भी वो हमारी हर आरजू पुगाता है,फिर कैसे मैं तुलना करूंँ किसी भी इंसान से अपने उस भगवान की,जो मुझे काबिल बनाने की खातिर रोज तिल-तिल मरता जाता है।लेखक-रितेश गोयल 'बेसुध'
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