शायरी

यहांँ हर घड़ी एक इंसान पैदा होता है,
मगर सफल उसी का जीना मरना जो मातृभूमि पर कुर्बान होता है,
मौत तो एक दिन सबको आनी है,
मगर तिरंगे में लिपटकर शहीद होने वाला देश भक्त जवान होता है।
लेखक-रितेश गोयल 'बेसुध'

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