जीवित पेड़

इंसानों की पापुलेशन बढ़ रही हैं भाई ,
इसलिए हो रही है जंगलों की सफ़ाई ,
हरे-भरे पेडों पर चल रही हैं आरी ,
इंसान की इस भूख़ से धरती गंजी हो गई सारी ,
माना कि बढ़ती जनसंख्या हैं प्रॉब्लम हमारी,
फिर इस के लिए ये जंगली पेड़ क्यों बोले सॉरी ,
अन्न जल और वायु सब हम को मिलता इनकी और से ,
फिर भी हम को समझ नहीं आती विज्ञान की डोर से ,
ऐ ! कुदरत कुछ ऐसा कर ये पेड़ जीवित हो जाये ,
अपने विकास की खातिर ये शहरो की और जाये ,
बड़ी-बड़ी इमारतों पर ये भी चलाये आरी ,
अपने को बसाने में साफ़ कर दे सीमाएं सारी ,
फिर शायद समझे इंसान इनकी लाचारी। 

जय हिन्द। 

By- Ritesh Goel 'Besudh'

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