बेटी
वो संस्कार से जन्मी हैं,अपने कुल की वो देवी हैं,मर्यादा की ज्योति से दूजे कुल को उज्जवल करती,
सारी ही ये सृष्टि उससे, कहलाती वो बेटी हैं,
प्यार से हर रिश्ते को सींचे, ऐसी कुशल वो गृहणी हैं,
अपने हर एक रूप में अव्वल, उच्चतम वो एक श्रेणी है,
पति पर प्यार लुटाने वाली, अच्छी वो एक प्रेमी हैं,
बच्चो को मर्यादित करती, सद्गुण की त्रिवेणी हैं,
संस्कार से जन्मी वो हैं,अपने कुल की देवी हैं,
सारी ही ये सृष्टि उससे, कहलाती वो बेटी हैं।
By-Ritesh Goel'Besudh'
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