ये यू ही मस्ती में लिखा था कोई बुरा न माने। तुम्हें क्या लगता हैं ये पापा की परियाँ सिर्फ स्कूटी ठोकती जायेंगी, अजी मौका देकर तो देखो ये तुम्हें हवाई जहाज से उड़ायेगी। लेखक- रितेश गोयल 'बेसुध'
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