मेरी अधूरी कहानी-hasya kavita
ये यू ही मस्ती में लिखा है कोई गंभीरता से न ले।
आओ पर्दा उठाते हैं उस अधूरी कहानी से,
मेरा भी दिल लगा था, मुझे भी इश्क़ हुआ था जवानी से,
मेरे कॉलेज का वो पहला दिन था,
उसकी ठोडी पे काला तिल था,
दो-चार सीनियर ने आकर मुझको घेरा था,
उसका चेहरा एकदम नया सवेरा था,
नई भर्तियों की टांग खींचना सीनियरस् की रिवायत थी,
उसके गालों पर गुलाबी आयत थी,
कॉलेज की कैंटीन का मालिक एक बंदर था,
उसकी आँखें गहरा समंदर था,
अंग्रेज़ी की टीचर कमाल थी,
उसके होंठों की लाली सूरख लाल थी,
जैसी मैंने चाही वैसी रूममेट पाई थी,
उसकी गर्दन सुराही थी,
चाहकर भी खुद को उसके दिल में टेक नहीं पाया,
गर्दन से नीचे मैं देख नहीं पाया,
लौंडो की सख़्ती पर यह एक सवाल था,
ओ भाई वो तो अपने सीनियर का माल था,
जीतकर भी हारना बाज़ीगर की चाल थी,
टूटे दिल से शायरी निकली बेमिसाल थी,
मोहब्बत के ढाई अक्षरों से मेरा खेल हो गया,
ये पप्पू कॉलेज के इम्तिहानो में फेल हो गया।
लेखक- रितेश गोयल 'बेसुध'
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