आओ मिलकर दिवाली मनाते हैं। -diwali

चलो अपनी एक ख़्वाहिश  पर विराम लगाते है, 
और किसी एक की दिवाली खुशियों से भर आते हैं, 
चलो किसी ओर में रावण ढूँढने की बजाय श्री राम के गुणों को अपनाते हैं, 
और खुद ही मर्यादा पुरुषोत्तम बन जाते हैं, 
चलो सीता की अग्नि परीक्षा लेने की बजाय, 
अपनी मानसिकता की अग्नि परीक्षा लेते हैं, 
और अपना जीवन सफल बनाते हैं, 
चलो जिस तरह दीपावली पर दीप जलाकर अंधेरा दूर भगाते है , 
उसी तरह अपने अंतर्मन में सुविचारों के दीप जलाकर कर अपना मन उज्जवल बनाते है, 
आओ मिलकर दिवाली मनाते हैं। 
लेखक- रितेश गोयल 'बेसुध'

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