भोले बाबा


वह नीलकंठ वह गंगाधर वह अर्धनारीश्वर कहलाए,
भक्तों की इच्छा पूरी करने मेरे भोले बाबा आए।

दुनिया की रक्षा करने को घातक विष जिसने कंठ लगाया,
विष को धारण करने वाला वह नीलकंठ कहलाया, दुनिया से पाप मिटाने को,गंगा धरती पर लाने को,
जिसने गंगा के वेग को अपनी जटाओं मे धारण करवाया,
गंगा को धारण करने वाला वह गंगाधर कहलाया,
सच्चे प्रेम का पाठ जिसने सृष्टि को पढ़ाया,
शिव मे शक्ति और शक्ति मे शिव ही समाया,
सच्चे प्यार का वह अप्रतिम रुप अर्धनारीश्वर कहलाया, 
सावन में जिसने भी सच्चे मन से शिवलिंग पर जल है चढ़ाया,
उसकी हर इच्छा पूरी करने स्वयं भोला बाबा आया।
लेखक-रितेश गोयल 'बेसुध' 

No comments