शराब
पीने से पहले छींटा देवे कहकर जय सोमरस जाम,
शराब तेरी महिमा का मैं क्या-क्या करूंँ बखान,
तुझे पीने वाला खुद को समझें है बलवान,
तुझे पीकर ही शोले का वीरू टंकी पर चढ़ पाया था,
तेरी महिमा से ही उसने फिर बसंती को पटाया था,
याद है उस शराबी का किस्सा,जो तुझे पीकर शेर की गुफा में घुस आया था,
फिर उस शेर को बचाने पूरा चिड़िया घर आया था,
तेरा एक क्वार्टर भी शराबी को स्टार्ट कर देता है,
तेरे उसमें जाते ही वह माइलेज अपार देता है,
तुझे पीकर चूहा भी खुद को शेर बताता है,
दिनभर बीवी से डरने वाला तुझे पीते ही उस बीवी पर गुर्राता है,
महखाने से जब भी कोई शराब पीकर निकलता है, टकराकर हर खंभे से उनको माफ कर देता है,
आखिर में जब वह तेरा सेवक नाली में गिर जाता है,
तो कुत्ता उसे फिर अपने तरीके से जगाता है,
मुंँह पर गिरे उन छींटों को पानी समझकर वह अपना मुंँह साफ कर लेता है,
फिर से मधुशाला के लिए खुद को तैयार कर लेता है।
आज की महफिलों में शराब तेरा मुख्य किरदार है, लड़का हो या लड़की सबके हाथ में शराब है।
लेखक-रितेश गोयल 'बेसुध'
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