शायरी

अभी बचपन हूं मैं मुझको जवानी बनने दो,
हर शख्स दोहराए वो रवानी बनने दो,
जो छोड़ कर गई थी मुझको वो मेरी नज़में गाएगी, अभी किस्सा हुँ मैं मुझको कहानी बनने दो।
 लेखक-रितेश गोयल 'बेसुध'

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